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Sunday, 29 July 2018

देश को रक्षा उत्पादन का हब बनाने की तैयारी, अगले महीने नई पॉलिसी जारी कर सकती है सरकार

भारत ने पिछले पांच सालों में 111 फीसदी ज्यादा हथियार आयात किए

Government to unveil key policy next month to make India defence manufacturing hub
देश को रक्षा उत्पादन का हब बनाने की तैयारी, अगले महीने नई पॉलिसी जारी कर सकती है सरकार
- पॉलिसी तैयार होने के बाद इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा
- लड़ाकू विमान और बड़े सैन्य उपकरण तैयार करने पर जोर होगा

नई दिल्ली.  मोदी सरकार लड़ाकू विमान और बड़े रक्षा उपकरण तैयार करने वाले दुनिया के शीर्ष पांच देशों की सूची में शामिल होने के लिए अहम पॉलिसी तैयार कर रही है। रक्षा मंत्रालय के एक अफसर ने बताया कि पॉलिसी का खाका तैयार होने पर इसे कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके अगले महीने जारी होने की संभावना है। इसके जरिए सरकार 2025 तक सैन्य उपकरणों और सेवाओं के टर्नओवर को 1 लाख 70 हजार करोड़ रुपए तक बढ़ाना चाहती है।
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, डिफेंस प्रोडक्शन पॉलिसी (डीपीपी-2018) के तहत सरकार का जोर लड़ाकू विमान, हमलावर हेलिकॉप्टर समेत बड़े हथियारों को देश में बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन और तकनीक जुटाना है। ताकि वह अपनी और मित्र देशों की सैन्य जरूरतें पूरी कर सके। भारत छह दशकों से सैन्य उपकरणों को आयात कर रहा है।
भारत सबसे बड़ा हथियार आयातक : स्वीडन के थिंक टैंक ने रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा वक्त में भारत मिलिट्री हार्डवेयर का सबसे बड़ा आयातक है। 2004-2008 के मुकाबले बीते पांच सालों में भारत ने 111% ज्यादा हथियार आयात किए। 
डीपीपी में खरीद प्रक्रिया आसान होगी : आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने चार सालों में सैन्य उपकरणों और हथियारों के लिए देशी-विदेशी कंपनियों से 2.40 लाख करोड़ रुपए कीमत के करीब 187 समझौते किए। हालांकि, इनमें से ज्यादातर अटके हुए हैं। नई नीति में रक्षा सामग्री की खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। साथ ही प्रोजेक्ट में उन मंजूरियों को कम किया जाएगा, जिनसे प्रोजेक्ट में देरी होती है।

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