कोर्ट ने 2015 से मार्च 2017 तक महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के सोशल ऑडिट में मिले बच्चों की हालत पर चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा- 1575 लड़के-लड़कियां उत्पीड़न के शिकार, शेल्टर होम्स के मामलों में क्या किया?
- शेल्टर होम्स की ऑडिट रिपोर्ट पेश करने पर कोर्ट ने पूछा- किन राज्यों ने अब तक कार्रवाई नहीं की?
- यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को देखते हुए बाल सुरक्षा नीति बनाने पर विचार कर रही केंद्र सरकार
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने शेल्टर होम में रहने वाले बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों पर मंगलवार को चिंता जाहिर की। साथ ही, केंद्र सरकार से पूछा कि इस तरह के मामलों में पीड़ित नाबालिगों की देखभाल को लेकर क्या कदम उठाया गया? सर्वोच्च न्यायालय ने यह सवाल तब किया, जब सरकार बाल सुरक्षा नीति बनाने पर विचार कर रही है। नीति बनाने का फैसला महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के 2015 से मार्च 2017 तक किए सोशल ऑडिट के बाद किया गया। ऑडिट में यौन उत्पीड़न के शिकार 1575 बच्चे मिले थे, जो अभी भी शेल्टर होम में रह रहे हैं। जस्टिस मदन बी लोकुर ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि क्या इन बच्चों की देखभाल सही तरीके से हो रही है या शेल्टर होम में भी वे परेशान हैं?
बेंच में शामिल जस्टिस एस अब्दुल नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद से पूछा, ''इन मामलों में उठाए गए कदम को लेकर केंद्र की ओर से कौन जवाब देगा? 1575 बच्चे और लड़कियां यौन उत्पीड़न के शिकार हैं। आपने उनके लिए क्या किया? उन्हें किस तरह के शेल्टर होम में रखा गया है? राज्य इन मामलों में क्या कदम उठा रहे हैं?''
एएसजी से मांगी राज्यों की कार्रवाई की रिपोर्ट: एएसजी ने सभी राज्यों को पिछले साल ही सोशल ऑडिट रिपोर्ट सौंपने की बात कही तो कोर्ट ने पूछा, ‘‘हमें बताइए कि किन राज्यों ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की।’’ एएसजी ने कहा कि वह इस बारे में जानकारी लेने के बाद कोर्ट को सूचित करेंगी। वहीं, सरकार ने कोर्ट को बताया कि मंत्रालय ने देशभर के 678 जिलों में सोशल ऑडिट किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ये बच्चे 9589 शेल्टर होम में रह रहे हैं। इन इंस्टिट्यूशंस के अलावा 32% बाल देखभाल केंद्र जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण ) एक्ट के तहत पंजीकृत किए गए हैं। वहीं, 33% गैर-पंजीकृत हैं। ऑडिट रिपोर्ट पेश करते हुए केंद्र ने कहा कि 8744 शेल्टर होम एनजीओ और प्राइवेट लोग चला रहे हैं, जबकि 845 शेल्टर होम सरकार की देखरेख में चल रहे हैं।
बच्चों की स्थिति पर पूछे सवाल: बेंच ने पूछा, ‘‘क्या ऑडिट के दौरान बच्चों से बात की गई? क्या शेल्टर होम में उनके साथ यौन उत्पीड़न का कोई मामला सामने आया? हमें चिंता इस बात की नहीं है कि कोई ऑडिट हुआ या नहीं। हम इससे परेशान हैं कि बच्चे खुश हैं या नहीं?’’ इस दौरान बिहार सरकार ने शेल्टर होम की स्थिति पर टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) की ओर से तैयार की गई ऑडिट रिपोर्ट बेंच के सामने पेश की। जजों ने पूछा, ‘‘इस रिपोर्ट में क्या छिपाया जा रहा है? इसे जारी करने में क्या आपत्ति थी?’’

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