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Thursday, 7 December 2017

अब काउंसलिंग के बाद ही विद्यार्थियों को मिलेगा 11वीं में विषय

स्कूली विद्यार्थियों द्वारा छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या करने की घटनाओं ने प्रदेश सरकार को चिंता में डाल दिया है।
इंदौर। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा छोटी-छोटी बातों पर आत्महत्या करने की घटनाओं ने प्रदेश सरकार को चिंता में डाल दिया है। ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब अगले शैक्षणिक सत्र से शिक्षकों को अभिभावक की भूमिका में लाया जा रहा है।
वहीं ग्याहरवीं कक्षा में काउंसलिंग के बाद ही विद्यार्थी को विषय दिया जाएगा ताकि वह अपनी क्षमता के अनुसार विषय का चयन कर कोर्स पूरा कर सके। स्कूलों को भी सरकार ने 11 बिंदुओं की गाइड लाइन जारी की है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नकारात्मक माहौल से बाहर लाकर उनका सर्वांगीण विकास करना है।

हाल ही में महिला बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने विधानसभा में प्रतिवेदन सौंपा था। इसमें छात्रों में बढ़ती आत्महत्या की मनोवृत्ति को कम करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों की जानकारी दी गई।

लोक शिक्षण आयुक्त ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र में अनिवार्य तौर पर कमेटी की अनुशंसाओं का पालन करने के आदेश जारी किए। इसमें सबसे अहम हायर सेकंडरी में छात्र की काउंसलिंग के बाद ही विषय आवंटित करना है। शिक्षक छात्र की क्षमताओं से पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही विषय देंगे। इससे वह भविष्य में पढ़ाई के दबाव या तनाव के चलते कोई गलत कदम उठाने की कोशिश नहीं करेगा।
स्कूलों को यह करना होगा
-राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन के तहत अगले साल 1 लाख विद्यार्थियों की विषय चयन के पहले काउंसलिंग की जाएगी। इसमें खास तौर पर अवसाद व कमजोर विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा।
-शिक्षक-पालक संघ की बैठक हर महीने अनिवार्य रूप से होगी। इसमें शिक्षक पढ़ाई के साथ अभिभावकों से निजी बातें भी करेंगे।
-30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक अभिभावक की तरह रहेगा। विद्यार्थी के स्वभाव में थोड़ा भी परिवर्तन होने पर वह परिजन से चर्चा करेगा।
-प्रत्येक स्कूल में एक पुरुष व एक महिला काउंसलर की नियुक्ति होगी। इन काउंसलर के मोबाइल नंबर सभी विद्यार्थियों के पास रहेंगे।
-स्कूलों में खेलकूद, एनसीसी, एनएसएस, संगीत, रेडक्रॉस आदि में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
-योग और ध्यान के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करना
-स्कूल की दीवारों पर प्रेरणास्पद स्लोगन लिखवाना
-स्कूली पाठ्यक्रम में महापुरुषों के संघर्ष और सफलता की यात्रा शामिल करना
-किताबी ज्ञान के साथ ही विद्यार्थियों को अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी मूल्यांकन कर मेरिट लिस्ट बनाएं ताकि उन्हें प्रोत्साहन मिले।
-स्कूल के 100 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों का सेवन नहीं होगा
-स्कूली विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए जिले में वरिष्ठ नागरिक, प्रबुद्ध नागरिक, एनजीओ और अभिभावकों के साथ मिलकर कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी से विद्यार्थी कभी भी संपर्क कर सकते हैं।

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