वकीलों का चीखना किसी कीमत पर सहन नहीं, उन्हें इंसाफ का मंत्री भी कहा जाता है: SC - Todays news hindi

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Thursday, 7 December 2017

वकीलों का चीखना किसी कीमत पर सहन नहीं, उन्हें इंसाफ का मंत्री भी कहा जाता है: SC

नई दिल्ली. हाल के दिनों में सीनियर वकीलों के कोर्ट रूम में चीख-चीखकर दलीलें देने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए वॉर्निंग दी है। गुरुवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली कान्सटीट्यूशन बेंच ने कहा- पारंपरिक तौर पर वकीलों को इंसाफ का मंत्री भी कहा जाता है। इस तरह का रवैया किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। 


दो मामलों का जिक्र

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस हफ्ते दो बार ऐसा हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकीलों ने कोर्ट रूम में चीखते हुए दलीलें दीं। 
- गुरुवार को चीफ जस्टिस की अगुआई वाली कान्स्टीट्यूशन बेंच पारसी महिलाओं के दूसरे मजहब के शख्स से शादी के मामले पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान कोर्ट रूम सीनियर वकीलों के चीखने का मुद्दा भी उठा। इस बेंच में जस्टिस एके. सीकरी, जस्टिस एएम. खानविलकर, जस्टिस डीवाय. चंद्रचूढ़ और जस्टिस अशोक भूषण भी शामिल थे।  
- बेंच ने कहा- कल (बुधवार को दिल्ली सरकार बनाम केंद्र मामले की सुनवाई के दौरान) क्या हुआ था, वो घटिया था? इसके पहले, परसों (मंगलवार को अयोध्या विवाद केस की सुनवाई के दौरान) जो हुआ वो इससे भी ज्यादा घटिया बर्ताव था। 

अयोध्या केस में तीन वकीलों के बर्ताव पर नाराजगी

- मंगलवार को अयोध्या केस की सुनवाई के दौरान सीनियर वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और दुष्यंत दवे ने बहुत ऊंची आवाज में दलीलें दीं थीं। ये इस केस की सुनवाई 2019 तक टालने की मांग कर रहे थे। इनमें से कुछ ने तो सुनवाई छोड़कर जाने की धमकी तक दे दी थी। 
- इसी तरह दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच विवाद मामले की सुनवाई के दौरान धवन ने कुछ दलीलें फिर इसी तरह चीखते हुए दी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें नहीं माना था। 
- चीफ जस्टिस ने कहा- चाहे जो हो, कोर्ट में चीखना किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। वकीलों को पारंपरिक तौर पर जस्टिस मिनिस्टर्स कहा जाता है। बदकिस्मती से वकीलों का एक छोटा ग्रुप ये सोच रहा है कि वो अपनी आवाज इस अंदाज में उठा लेंगे तो उन्हें इसकी अथॉरिटी और मंजूरी मिलेगी। लेकिन, इस तरह से आवाज उठाना आपकी कमजोर तैयारी और कमजोर दलीलों को ही साबित करता है। 

 

बार के सीनियर वकील भी शामिल

- चीफ जस्टिस ने ये भी कहा कि ऊंची आवाज में दलीलें पेश करने के मामले में बार एसोसिएशन के सीनियर वकील भी शामिल हैं। 
- उन्होंने कहा- जब ये वकील संवैधानिक भाषा में अपनी बात नहीं करते तो हम कब तक ये सहन करेंगे? अगर बार खुद के नियम नहीं बनाता तो फिर हमको ही ये काम करना होगा। बेंच ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में वकीलों के दलील रखने के तरीके को खास तौर पर शर्मनाक करार दिया।  

क्या हुआ था अयोध्या केस में

- मंगलवार को इस पर सुनवाई हुई थी। सिब्बल ने कहा था कि इस मामले की सुनवाई जुलाई 2019 के पहले नहीं की जानी चाहिए। इसका राजनीतिक तौर पर असर हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता और वकील सिब्बल की दलील खारिज करते हुए कहा था- आपकी दलील बेतुकी है। हम सियासत नहीं, तथ्य देखते हैं। 
- सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील सिब्बल, धवन और दवे ने बेंच को सुनवाई छोड़ने की धमकी दी थी। एक पक्षकार ने बीच में बोलने की कोशिश की तो बेंच ने उसे बाहर निकाल दिया। मामले की अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी। 

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