नई दिल्ली. 'एक देश-एक चुनाव' के लिए बीजेपी ने अपनी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों को लेटर लिखा है। इसमें सभी से इस आइडिया पर एक राय बनाने को कहा है। इनसे कहा गया है कि बीजेपी शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री आम सहमति बनाने में विपक्ष के नेताओं से भी बातचीत करें। यह लेटर बीजेपी नेशनल जनरल सेक्रेटरी भूपेंद्र यादव ने भेजा है। बता दें कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सभी चुनाव एकसाथ होना चाहिए। इससे देश का बोझ कम होगा।
संसद में बताया था एक देश-एक चुनाव का गणित
- राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद दिया था। इस दौरान उन्होंने एक देश-एक चुनाव की वकालत की थी। उन्होंने कहा था-" ''राष्ट्रपति जी ने स्पीच में लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने का जिक्र किया। प्रणब दा ने भी कहा था। ये हम सभी का काम है। हम सब हिम्मत करके एक स्वस्थ परंपरा की दिशा में जा सकते हैं क्या? 1967 तक लोकसभा-विधानसभा साथ हुए। एकाध अपवाद हो सकते हैं। तब कोई तकलीफ नहीं हुई। बाद में राजनीतिक कारणों से असंतुलन पैदा हुआ। अब एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। चुनाव के वक्त तूतू-मैंमैं ठीक है।''
- ''चार-साढ़े चार तक देश के लिए कामों पर चर्चा हो। 2009 में चुनाव पर एक हजार करोड़ खर्च हुआ, 2014 में चार हजार करोड़ खर्च हुआ। उसके बाद असेंबली में 3 हजार करोड़ खर्च हुए। भारत में गरीबों के लिए करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारे यहां एक करोड़ से ज्यादा लोग 9 लाख 30 हजार पोलिंग स्टेशन पर जाते हैं। सिक्युरिटी फोर्सेस सुरक्षा में लगते हैं। इसमें मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मिलकर रास्ता खोजें और इसे आगे बढ़ाने में सफल हो सकते हैं।''
चुनाव त्योहार की तरह
- नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था, "चुनावों को त्योहार खासकर होली की तरह होना चाहिए। यानी आप उस दिन किसी पर रंग या कीचड़ फेंके और अगली बार तक के लिए भूल जाएं। मेरा विचार है कि देश में एकसाथ यानी 5 साल में एक बार संसदीय, विधानसभा, सिविक और पंचायत चुनाव होने चाहिए। एक महीने में ही सारे चुनाव निपटा लिए जाएं।''
- "इससे पैसा, संसाधन, मैनपावर तो बचेगा ही, साथ ही सिक्युरिटी फोर्स, ब्यूरोक्रेसी और पॉलिटिकल मशीनरी को हर साल चुनाव के लिए 100-200 दिन के लिए इधर से उधर नहीं भेजना पड़ेगा।''
देश का बोझ कम हो जाएगा
- मोदी ने कहा कि एकसाथ चुनाव करा लिए जाते हैं तो देश एक बड़े बोझ से मुक्त हो जाएगा। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते तो ज्यादा से ज्यादा संसाधन और पैसा खर्च होता रहेगा। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद देश में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए।
- " 2018 में 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, जबकि 2019 में लोकसभा इलेक्शन होने हैं। ये किसी एक पार्टी या एक व्यक्ति का एजेंडा नहीं है। देश के फायदे के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। इसके लिए चर्चा होनी चाहिए।''
चिदंबरम ने कहा था- 'एक देश- एक टैक्स' की तरह 'एक देश-एक चुनाव' मोदी का जुमला
- कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने पिछले दिनों कहा था कि मौजूदा संविधान के तहत केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में सरकार का कार्यकाल फिक्स नहीं है। अगर कोई सरकार बहुमत के अभाव में गिर जाती है तो क्या वहां पांच साल पूरे होने तक राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा।
- चिदंबरम ने कहा कि जिस तरह एक देश-एक टैक्स मोदी का जुमला था, उसी तरह एक देश-एक चुनाव भी मोदी का जुमला है।
इलेक्शन कमीशन ने कहा था- सितंबर 2018 तक पूरी कर लेंगे तैयारी
- चीफ इलेक्शन कमिशनर ओपी रावत ने भोपाल में कहा था कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की तैयारी चुनाव आयोग सितंबर 2018 तक पूरी कर लेगा।
- मीडिया से बात करते वक्त उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने आयोग से पूछा था कि एक साथ चुनाव कराने के लिए क्या-क्या संसाधनों की जरूरत है। इस पर आयोग की मांग पर केंद्र सरकार ने पिछले माह 15,400 करोड़ रुपए आयोग को दिए हैं। रावत ने बताया कि दोनों चुनाव एक साथ कराने के लिए 40-40 लाख ईवीएम और वीपीपीटी मशीनों की जरूरत है।
- राष्ट्रपति के बजट अभिभाषण पर नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में धन्यवाद दिया था। इस दौरान उन्होंने एक देश-एक चुनाव की वकालत की थी। उन्होंने कहा था-" ''राष्ट्रपति जी ने स्पीच में लोकसभा-विधानसभा चुनाव साथ कराने का जिक्र किया। प्रणब दा ने भी कहा था। ये हम सभी का काम है। हम सब हिम्मत करके एक स्वस्थ परंपरा की दिशा में जा सकते हैं क्या? 1967 तक लोकसभा-विधानसभा साथ हुए। एकाध अपवाद हो सकते हैं। तब कोई तकलीफ नहीं हुई। बाद में राजनीतिक कारणों से असंतुलन पैदा हुआ। अब एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव की तैयारी शुरू हो जाती है। चुनाव के वक्त तूतू-मैंमैं ठीक है।''
- ''चार-साढ़े चार तक देश के लिए कामों पर चर्चा हो। 2009 में चुनाव पर एक हजार करोड़ खर्च हुआ, 2014 में चार हजार करोड़ खर्च हुआ। उसके बाद असेंबली में 3 हजार करोड़ खर्च हुए। भारत में गरीबों के लिए करना हमारी जिम्मेदारी है। हमारे यहां एक करोड़ से ज्यादा लोग 9 लाख 30 हजार पोलिंग स्टेशन पर जाते हैं। सिक्युरिटी फोर्सेस सुरक्षा में लगते हैं। इसमें मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मिलकर रास्ता खोजें और इसे आगे बढ़ाने में सफल हो सकते हैं।''
- नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों एक इंटरव्यू में कहा था, "चुनावों को त्योहार खासकर होली की तरह होना चाहिए। यानी आप उस दिन किसी पर रंग या कीचड़ फेंके और अगली बार तक के लिए भूल जाएं। मेरा विचार है कि देश में एकसाथ यानी 5 साल में एक बार संसदीय, विधानसभा, सिविक और पंचायत चुनाव होने चाहिए। एक महीने में ही सारे चुनाव निपटा लिए जाएं।''
- मोदी ने कहा कि एकसाथ चुनाव करा लिए जाते हैं तो देश एक बड़े बोझ से मुक्त हो जाएगा। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते तो ज्यादा से ज्यादा संसाधन और पैसा खर्च होता रहेगा। 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद देश में उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव हुए।
- " 2018 में 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, जबकि 2019 में लोकसभा इलेक्शन होने हैं। ये किसी एक पार्टी या एक व्यक्ति का एजेंडा नहीं है। देश के फायदे के लिए सबको मिलकर काम करना होगा। इसके लिए चर्चा होनी चाहिए।''
- कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने पिछले दिनों कहा था कि मौजूदा संविधान के तहत केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में सरकार का कार्यकाल फिक्स नहीं है। अगर कोई सरकार बहुमत के अभाव में गिर जाती है तो क्या वहां पांच साल पूरे होने तक राष्ट्रपति शासन लगाया जाएगा।
- चीफ इलेक्शन कमिशनर ओपी रावत ने भोपाल में कहा था कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की तैयारी चुनाव आयोग सितंबर 2018 तक पूरी कर लेगा।


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